शिवपुरी। शहर में इन दिनों एक ओर जहां मेगा स्वास्थ्य शिविर की व्यवस्थाओं और मॉनिटरिंग की जमकर सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर सिंध जलावर्धन परियोजना की अनदेखी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह की सख्त निगरानी शहर के बहुप्रतीक्षित जल प्रोजेक्ट पर भी होती, तो आज गर्मी के मौसम में शिवपुरी की जनता को पानी के लिए परेशान न होना पड़ता।
शहर के एक स्कूल में आयोजित सात दिवसीय स्वास्थ्य शिविर में न केवल शिवपुरी बल्कि आसपास के संभागों से भी मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इस शिविर की मॉनिटरिंग के लिए सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया अपनी टीम के साथ सक्रिय रूप से व्यवस्थाओं का जायजा ले रही हैं। उनके दौरे और लोगों से आत्मीय बातचीत के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
प्रियदर्शिनी सिंधिया ने शिवपुरी के बाद अशोकनगर क्षेत्र का भी दौरा किया, जहां उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत की और महिला कार्यक्रमों में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय दुकानों पर जाकर साड़ी देखी और भेलपुरी का स्वाद भी लिया, जिसकी उन्होंने सराहना की। उनके सहज व्यवहार को लोगों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है।
इधर, शहर में पानी की समस्या गंभीर बनी हुई है। सिंध जलावर्धन परियोजना, जो करीब दो साल में पूरी होनी थी, वह 18 साल बाद भी अधूरी है। इसके चलते गर्मी बढ़ने के साथ ही लोग प्राइवेट टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं, जो एक दिन की देरी से उपलब्ध हो रहे हैं और महंगे भी हैं। वहीं, स्वास्थ्य शिविर में नगरपालिका के टैंकरों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जिससे आम जनता में असंतोष भी बढ़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस मेगा स्वास्थ्य शिविर में रेडक्रॉस, राज्य सरकार के विशेष पैकेज और माधवराव सिंधिया ट्रस्ट का आर्थिक सहयोग शामिल है। साथ ही, कुछ सामाजिक संस्थाओं द्वारा डॉक्टरों की व्यवस्था भी की गई है। इसे लेकर शहर में यह चर्चा भी जोरों पर है कि आयोजन में योगदान कई लोगों का है, लेकिन श्रेय कुछ चुनिंदा नामों को मिल रहा है।
कुल मिलाकर, शिवपुरी में एक ओर स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर मॉनिटरिंग की सराहना हो रही है, तो वहीं दूसरी ओर जल संकट और अधूरी परियोजनाओं को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर सवाल भी उठ रहे हैं।








