मध्यप्रदेश में मौत का कुआं बने खुले बोरवेल — आखिर कब जागेगा सिस्टम?

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उज्जैन (मध्यप्रदेश): उज्जैन में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। 3 वर्षीय मासूम भागीरथ की खुले बोरवेल में गिरने से मौत हो गई। यह घटना एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बच्चा खेलते-खेलते खेत के पास बने एक खुले बोरवेल में जा गिरा। मौके पर पहुंची प्रशासन और राहत टीमों ने काफी देर तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, लेकिन मासूम को बचाया नहीं जा सका। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया, वहीं क्षेत्र में गुस्सा और दुख का माहौल है।

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि मध्यप्रदेश में हर साल ऐसे कई हादसे सामने आते हैं, जिनमें 4–5 मासूम बच्चों की जान चली जाती है। बावजूद इसके, खुले बोरवेल को बंद करने और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।

लापरवाही या सिस्टम की विफलता?

खुले बोरवेल लंबे समय से खतरे का कारण बने हुए हैं। नियमों के अनुसार, बोरवेल उपयोग के बाद उसे पूरी तरह बंद करना अनिवार्य है, लेकिन कई स्थानों पर इसका पालन नहीं हो रहा है।

लोगों की मांग:

खुले बोरवेल छोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई हो

भारी जुर्माना और जेल का प्रावधान लागू किया जाए

जिला स्तर पर विशेष अभियान चलाकर सभी खुले बोरवेल को चिन्हित कर बंद किया जाए

ग्राम पंचायत और नगर निकायों की जिम्मेदारी तय की जाए

प्रशासन की अपील:

स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी खुला बोरवेल दिखाई दे तो तुरंत सूचना दें, ताकि समय रहते उसे सुरक्षित किया जा सके।

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक लापरवाही के कारण मासूमों की जान जाती रहेगी? अब जरूरत है सख्त कानून और जमीनी स्तर पर सख्ती से अमल की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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Author: DRM India News

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