1973 जैसा तेल संकट? ईरान-अमेरिका तनाव से दुनिया में फिर बढ़ा ऊर्जा संकट का खतरा

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर दुनिया ऊर्जा संकट की दहलीज पर खड़ी नजर आ रही है। 1973 Oil Crisis की यादें ताजा हो गई हैं, जब तेल की कीमतों में कई गुना उछाल आया था और कई देशों में गाड़ियों के इस्तेमाल तक पर प्रतिबंध लगाना पड़ा था।
वर्तमान में Strait of Hormuz के बंद होने से वैश्विक आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के करीब 25% कच्चे तेल की सप्लाई का प्रमुख रास्ता है। ऐसे में इसका बंद होना पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 1973 Oil Crisis के दौरान भी तेल उत्पादक देशों द्वारा सप्लाई रोकने से वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल गई थी। पेट्रोल-डीजल की कीमतें अचानक कई गुना बढ़ गई थीं, लंबी कतारें लगती थीं और कई देशों में “कार-फ्री डे” जैसे नियम लागू किए गए थे।
आज के हालात भी कम गंभीर नहीं हैं। Iran, United States और Israel के बीच बढ़ते टकराव ने ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। इसका सीधा असर भारत समेत एशियाई और यूरोपीय देशों पर पड़ रहा है, जो तेल आयात पर निर्भर हैं।
अगर यह संकट लंबा खिंचता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। साथ ही महंगाई, ट्रांसपोर्ट लागत और आम लोगों की जिंदगी पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें मध्य पूर्व के हालात पर टिकी हैं, क्योंकि आने वाले दिनों में यह तय करेगा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था किस दिशा में जाएगी।








